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एनिमल लिबरेशन कॉन्फ्रेंस इंडिया 2026: एनिमल एक्टिविज़्म को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने पर केंद्रित रहा पहला दिन
इंदौर, 09 जनवरी 2026 : पशु अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद और ज़मीनी कार्य को मज़बूती देने के उद्देश्य से इंदौर में आयोजित एनिमल लिबरेशन कॉन्फ्रेंस इंडिया 2026 के पहले दिन देशभर से आए पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 9, 10 और 11 जनवरी 2026 को इंदौर स्थित क्राउन पैलेस में इंदौर एनिमल लिबरेशन द्वारा आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन के सत्रों में पशु क्रूरता, जागरूकता और संगठित आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जिसमें वकील, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य पशु अधिकारों से जुड़े प्रयासों को केवल चर्चा तक सीमित न रखते हुए उन्हें ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाना है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में पशु क्रूरता से जुड़े कानूनों की जानकारी, उनके सही उपयोग की प्रक्रिया, जांच और दस्तावेज़ीकरण, मीडिया एवं सोशल मीडिया के ज़रिये जागरूकता फैलाने तथा स्थानीय स्तर पर संगठित समूह तैयार करने जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
पहले दिन एनिमल एक्टिविस्ट यगना सहपाठी ने जानवरों के साथ हो रहे अत्याचारों की पहचान, जांच और दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पशुओं पर होने वाली हिंसा के कई मामले सामने नहीं आ पाते, क्योंकि उन्हें सामान्य या अनदेखा कर दिया जाता है। ऐसे में आम नागरिकों और एनिमल एक्टिविस्ट्स की सतर्कता बेहद ज़रूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में सही साक्ष्य एकत्र करना, घटनाओं का रिकॉर्ड रखना और कानूनी तरीके से शिकायत दर्ज कराना पशुओं को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यगना ने यह भी कहा कि जब जांच सही तरीके से की जाती है, तो कानून तक पशुओं की आवाज़ पहुँचाना संभव हो पाता है।
इस अवसर पर यूट्यूबर एवं एनिमल एक्टिविस्ट सुरेश व्यास ने पब्लिक रैलियों और जनसभाओं में जानवरों के साथ हो रहे शोषण, क्रूरता और उपेक्षा जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरूक करने के व्यावहारिक तरीकों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब सड़कों, डेयरी, पोल्ट्री, प्रयोगशालाओं और अन्य स्थानों पर जानवरों की वास्तविक स्थिति के बारे में तथ्य सामने रखे जाते हैं, तब लोगों को मुद्दे की गंभीरता समझ आती है। उन्होंने कहा कि एनिमल राइट्स जैसे संवेदनशील विषय पर संवाद की भूमिका सबसे अहम होती है और भीड़ को समझाने के लिए आक्रामकता या टकराव की भाषा प्रभावी नहीं होती। इसके बजाय तथ्यों, वास्तविक उदाहरणों और संवेदनशील संवाद के माध्यम से यह बताया जाना चाहिए कि रोज़मर्रा की गतिविधियों में जानवर किस तरह पीड़ा झेलते हैं।
इंदौर एनिमल लिबरेशन की को-फाउंडर दुर्गा बलानी ने कहा कि एनिमल एक्टिविज़्म को मज़बूती तभी मिलेगी जब अलग-अलग शहरों के लोग आपस में जुड़कर एक साझा कम्युनिटी बनाएँ। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन देशभर के एनिमल एक्टिविस्ट्स को जोड़ने, अनुभव साझा करने और अपने-अपने शहरों में संगठित रूप से काम करने की दिशा तय करने का अवसर प्रदान कर रहा है।
सम्मेलन के पहले दिन हेल्थ कोच आशीष जैन ने वीगन फ़ूड और वीगन जीवनशैली पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वीगन भोजन सीधे तौर पर जानवरों के शोषण और हिंसा को कम करने से जुड़ा हुआ है, क्योंकि इसमें पशुओं से प्राप्त किसी भी उत्पाद का उपयोग नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि वीगन होना केवल करुणा का विषय नहीं है, बल्कि यह बेहतर स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली की दिशा में भी एक प्रभावी कदम है। आशीष जैन ने लोगों को यह समझाया कि रोज़मर्रा के खान-पान में छोटे बदलाव कर धीरे-धीरे वीगन विकल्प अपनाकर जानवरों के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाई जा सकती है।
इस सम्मेलन का समापन 11 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पशु अधिकार मार्च, इंदौर 2026 के साथ किया जाएगा। यह मार्च भारत में पशु अधिकारों से जुड़े एक अत्यंत गंभीर और लंबे समय से अनदेखे मुद्दे पर केंद्रित होगा: जानवरों के साथ यौन शोषण को कानून की श्रेणी में लाना। पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अंतर्गत जानवरों के साथ यौन शोषण एक गंभीर अपराध माना जाता था, लेकिन भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद इस तरह की हिंसा पर स्पष्ट रूप से कोई अपराधी कानून मौजूद नहीं है।


